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पन्‍ना रत्न

पन्‍ना बुध ग्रह का रत्‍न है। यह बहुत चमकदार होता है। इसकी चमक के बारे में प्राचीनकाल में ऐसा कहा जाता था कि शुद्ध पन्‍ना सूर्य के प्रकाश में भी अपनी आभा बिखेरता नजर आता है। ऐसा कहा जाता है कि अगर कम्‍प्‍यूटर पर काम करते हुए या पढ़ते हुए आंख थक जाए तो पन्‍ने को आंखों में रखने पर वह तरोताजा हो जाती है। इस बात के प्रमाण मिलते हैं कि पन्‍ना चार हजार साल पहले से भी लोगों के बीच लोकप्रीय है।

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पन्‍ना रत्न की प्राकृतिक उपलब्‍धता

पन्‍ना कई दूसरे रत्‍नों की तरह खानों में पाया जाता है जहां ये कई अशुद्धियों के साथ होते हैं। खानों से निकाल कर सबसे पहले उनकी अशुद्धि‍यां दूर की जाती है। इसके बाद इन्‍हें विभिन्‍न आकार में तराश कर बाजार में भेजा जाता है। वर्तमान में कोलम्‍बिया की खानों में सबसे अच्‍छा पन्‍ना पाया जाता है। इसके बाद रूस और ब्राजील में मिलने वाले पन्‍ने सबसे बेहतर माने जाते हैं। मिश्र, नार्वे, भारत, इटली, आस्‍ट्रेलिया, अफ्रीका और आस्‍ट्रिया में भी पन्‍ने की खाने हैं।

भारत में यह मुख्‍यत: दक्षिण महानदी, हिमालय, सोमनदी व गिरनार में पाया जाता है।

विज्ञान और पन्‍ना रत्न

पन्‍ना ग्रेनाइट, पेग्‍मेटाइट व चूने के पत्‍थरों के मिश्रण से बनता है। इसका रासायनिक फार्मुला Be3Al2(SiO3)6 होता है। इसकी कठोरता 7.75 होती है और आपेक्षिक घनत्‍व 2.69 से 2.80 तक होता है। यह प्रकाश के परावर्तन की भी क्षमता रखता है इसकी परावर्तन क्षमता 1.57 से 1.58 के बीच होती है। ये एक पारदर्शक रत्‍न है जो प्राय: हरा और नीला-हरा दो तरह के रंगों में पाया जाता है।

पन्‍ना रत्न के गुण

पन्‍ना रत्न का सबसे बड़ा गुण होता है कि यह सूर्य के समान खुद प्रकाशि‍त होने की क्षमता रखता है। इसको देखने पर ऐसा लगता है कि यह अपने चारों ओर प्रकाश पुंज से एक आभा बनाता है। यह चमकदार, पारदर्शक, भारी तथा लचीला रत्‍न है।

ज्‍योतिष और पन्‍ना रत्न के लाभ

पन्‍ना बुध का रत्‍न है और बुध अच्‍छे फल देने वाला ग्रह है। इसलिए ज्‍योतिष में ऐसा माना जाता है कि पन्‍ना कोई भी पहने उसे लाभ अवश्‍य होता है। लेकिन कुंडली में निम्‍न प्रकार की स्‍थितियां होने पर इसे पहनना ज्‍यादा फलदायी होता है।

  1. पन्‍ना बुध का रत्‍न है और बुध मिथुन और कन्‍या राशि का स्‍वामी है। इसलिए मिथुन और कन्‍या लग्‍न की कुंडली में इसे पहनना बहुत लाभदायक होता है।
  2. यदि बुध कुंडली में छठे और आठवें भाव में हो तो भी पन्‍ना पहनना फायदा पहुंचाता है।
  3. बुध अगर कुंडली में मीन राशि में हो तो भी पन्‍ना पहनना अच्‍छा होता है।
  4. कुंडली में धनेष बुध नौवे स्‍थान में हो तो पन्‍ना पहनना लाभ देता है।
  5. सातवें भाव का स्‍वामी बुध दूसरे भाव में, नवें भाव का स्‍वामी बुध चौथे भाव में या भाग्‍येश बुध छठें भाव में हो तो पन्‍ना पहन कर बहुत लाभ प्राप्‍त किया जा सकता है।
  6. बुध की महादशा और अंतरदशा में भी पन्‍ना पहनना अच्‍छा होता है।
  7. जन्‍म कुंडली में बुध श्रेष्‍ठ भाव में अर्थात 2,3,4,5,7,9,10 और 11 में से किसी का स्‍वामी हो और अपने से छठे भाव में हो तो भी पन्‍ना पहनना बहुत अच्‍छा होता है।
  8. अगर कुंडली में बुध मंगल, शनि, राहु अथवा केतु के साथ स्थित हो तो पन्‍ना पहनना चाहिए।
  9. अगर बुध पर शत्रु ग्रह की दृष्‍टि हो तो भी पन्‍ना पहनना चाहिए।
  10. व्‍यापार-वाणिज्‍य, गणित व एकाउंटेंसी संबंधी कार्य से जुड़े लोग पन्‍ना अवश्‍य धारण करें। इससे अच्‍छे फल प्राप्‍त होंगे।

पन्‍ने का प्रयोग

बुधवार को चांदी की अंगूठी में इसे धारण किया जाता है। कुछ लोग इसे सोने में भी पहनते हैं लेकिन चांदी में धारण करना ज्‍यादा लाभ देता है। पन्‍ना कम से कम तीन रत्‍ती पहनना चाहिए। इसे खरीदकर विधिपूर्वक मंत्र और पूजा पाठ से जागृत किया जाता है। बुध रत्‍न को धारण करने से पहले इसे ऊं बुं बुधाय नम: मंत्र को 9000 बार जप करते हैं। इसे दाएं हाथ की छोटी अंगुली में पहनते हैं।

पन्‍ने का विकल्‍प

पन्‍ना कीमती रत्‍न है और इसे पहनना सबके बस की बात नहीं है इसलिए इसके स्‍थान पर एक्‍वामेरीन, हरे रंग का जिरकॉन, फिरोजा या पेरीडॉट धारण किया जाता है। पन्‍ने के स्‍थान पर हरे रंग का अकीक भी पहना जा सकता है।

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सावधानी

पन्‍ने के साथ मोती और मूंगा कभी भी नहीं पहनना चाहिए।